भोपाल से दिग्विजय के खिलाफ शिवराज उतरे तो यह सबसे हॉट सीट होगी, जीत-हार दोनों का भविष्य तय करेगी

भोपाल/इंदौर. अगर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा शिवराज सिंह चौहान को टिकट देती है तो यह देश की सबसे हॉट लोकसभा सीट बन जाएगी। यहां दो पूर्व मुख्यमंत्री आमने-सामने होंगे। दोनों के बीच 16 साल बाद मुकाबला होगा। इससे पहले 2003 में राघौगढ़ विधानसभा सीट पर दोनों के बीच मुकाबला हुआ था। शिवराज इस चुनाव में हार गए थे, लेकिन दो साल बाद मुख्यमंत्री बन गए थे। दिग्विजय यह चुनाव जीत गए थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई थी और दिग्विजय ने चुनावी राजनीति से ब्रेक ले लिया था। इस बार शिवराज और दिग्विजय की जीत या हार उनका राजनीतिक भविष्य तय करेगी।

शिवराज की जीत-हार के क्या मायने होंगे?

जीते तो : अगर 60 साल के शिवराज भोपाल से चुनाव लड़कर दिग्विजय के खिलाफ जीत जाते हैं तो मध्यप्रदेश भाजपा का सबसे बड़ा नेता होने की उनकी छवि और मजबूत हो जाएगी। अगर केंद्र में दोबारा मोदी सरकार बनती है तो मंत्रिमंडल में टॉप-3 नेताओं यानी राजनाथ, जेटली, सुषमा की तरह शिवराज को भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा भाजपा 2023 में होने वाला मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव एक बार फिर शिवराज के नेतृत्व में लड़ सकती है और वे फिर सीएम कैंडिडेट बन सकते हैं।

हारे तो :  2003 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राघौगढ़ से दिग्विजय के खिलाफ टिकट दिया था। शिवराज यहां हार गए थे। उमा भारती ही तब भाजपा का चेहरा थीं। वे मुख्यमंत्री बन गईं। लेकिन हार के बावजूद 2 साल बाद शिवराज ने प्रदेश की राजनीति में वापसी की और बिना विधायक रहते मुख्यमंत्री बनाए गए। इस बार अगर शिवराज दिग्विजय से हारते हैं तो मप्र में अगले विधानसभा चुनाव में सीएम कैंडिडेट के रूप में उनकी दावेदारी मुश्किल में पड़ सकती है। साथ ही, उनकी चुनावी हार से कैलाश विजयवर्गीय और नरेंद्र तोमर की पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व पर पकड़ ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

दिग्विजय के लिए नतीजों के क्या मायने होंगे : दिग्विजय के जीतने पर मध्यप्रदेश में उनके सबसे बड़े कांग्रेसी नेता होने की छवि और मजबूत होगी। वहीं, 16 साल बाद चुनावी राजनीति में वापसी के बाद भी अगर दिग्विजय यह चुनाव हारते हैं तो कमलनाथ ही कांग्रेस के मप्र के नंबर-1 नेता बन जाएंगे।

इंदौर में सुमित्रा का टिकट कटने पर क्या होगा?
सुमित्रा अगर यहां से चुनाव नहीं लड़ती हैं तो टिकट पाने के दो दावेदार कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड़ होंगे। पूर्व मंत्री विजयवर्गीय अभी भाजपा के बंगाल प्रभारी हैं। वे अभी इंदौर के लालच में बंगाल से अपना फोकस नहीं हटाना चाहते। इसकी बजाय वे दिग्विजय के खिलाफ भोपाल से चुनाव लड़कर पार्टी में अपना कद शिवराज से ऊंचा करना चाहते हैं। विजयवर्गीय इंदौर से उतरे तो सुमित्रा और उनके समर्थकों को ऐतराज हो सकता है। वहीं, 4 साल से महापौर और तीन बार से विधायक मालिनी गौड़ को अगर ताई की जगह टिकट मिलता है तो भाजपा की जीत आसान हो सकती है। शहर की तस्वीर बदलने में मजबूत भूमिका होने की मालिनी की छवि को पार्टी भुना सकती है।

इंदौर और भाेपाल सीट पर एक नजर 
भोपाल : इस सीट पर 1989 से भाजपा ही जीत रही है। इस लोकसभा सीट के तहत 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस को 3 और भाजपा को 5 सीटें मिली थीं। अब तक हुए 16 चुनाव में सिर्फ 5 बार कांग्रेस यहां जीत दर्ज कर पाई है।

इंदौर : यहां भी 30 साल से भाजपा जीत रही है। अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में इंदौर से कांग्रेस सिर्फ चार बार जीत सकी है। इंदौर लोकसभा सीट के तहत 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला बराबरी का रहा था। भाजपा और कांग्रेस ने 4-4 सीटें जीती थीं।

Comments