कश्मीर में तबाही का जैश का प्लान, लोकल आतंकियों को दे रहा बम बनाने की ट्रेनिंग

बीते महीने 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं. इस बीच आतंकी संगठन जैश-ए-संगठन का नया प्लान सामने आया है. खुफिया सूत्रों की मानें तो जैश एक बार फिर कश्मीर में अपने मंसूबों को कामयाब करने में जुटा है. जैश के कई कमांडर इन दिनों लोकल आतंकियों को बम बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं.

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बम बनाने के लिए जैश के कमांडर ट्रेनिंग दे रहे हैं, इनमें मुख्य तौर पर 5-6 लोकल आतंकी हैं जिन्हें बम असेंबल करने की ट्रेनिंग दी जा रही है.

पाकिस्तानी आतंकी अलीमीर उर्फ मुन्ना बाहरी इस बार मोर्चा संभाले हुए है जो लोकल आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा है. आतंकियों के बीच हुई बातचीत के इंटरसेप्ट से इस नए प्लान का खुलासा हुआ है.

बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर अलीमीर बम असेंबल करने और आईईडी ब्लास्ट में एक्सपर्ट है, यही कारण है कि इस बार उसे जिम्मा दिया गया है. सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी मूल के इस आतंकी ने पाकिस्तान के बालाकोट कैंप में ही ट्रेनिंग ली थी.

बालाकोट कैंप में अलीमीर काफी समय तक रहा था और अफगानी आतंकियों से उसने बम बनाना सीखा था. जैश के इस नए प्लान के खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं.

बता दें कि पुलवामा में भी जैश-ए-मोहम्मद के लोकल आतंकी आदिल अहमद डार ने आतंकी घटना को अंजाम दिया था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे.

इसी के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को तबाह किया था. बालाकोट कैंप जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा आतंकी अड्डा था, जहां वह युवा आतंकियों को ट्रेनिंग देते थे. हालांकि, पाकिस्तानी सरकार और सेना लगातार इस बात से इनकार करती रही है. लेकिन भारतीय वायुसेना ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके 80 फीसदी निशाने बिल्कुल सटीक लगे थे, जहां उन्होंने आतंकी अड्डों को तबाह किया है.

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो गया है. इसी के साथ सवाल भी उठने लगे हैं. सबसे ज्यादा सवाल जम्मू-कश्मीर में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव ना कराने पर पूछे जा रहे है. घाटी में मुख्यधारा के सभी सियासी दलों ने चुनाव आयोग से पूछा है कि जब लोकसभा चुनाव कराने का माहौल है, तो विधानसभा के लिए क्यों नहीं? लेकिन जानकारों की मानें तो आज के माहौल में विधानसभा चुनाव कराना मुश्किल होता.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि सभी दल चाहते हैं कि राज्य में एकसाथ (लोकसभा और विधानसभा) चुनाव हों. लोकसभा चुनाव के लिए माहौल सही है तो फिर राज्य के चुनाव के लिए क्यों नहीं? स्थानीय चुनाव यहां शांति पूर्ण ढंग से संपन्न हुए, घाटी में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात है, फिर भी राज्य के चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे? वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि लोगों को सरकार का चुनाव नहीं करने देना लोकतंत्र के विचार के खिलाफ है. इसके अलावा एक एजेंडे के तहत लोगों को अलग-थलग करने के लिए समय लेने की रणनीति पर काम किया जा रहा है जो उनके (केंद्र सरकार) परोक्ष उद्देश्यों के अनुरूप है.

चुनाव आयोग ने सुरक्षा का हवाला देते हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव नहीं कराने का फैसला लिया है. इससे पहले चुनाव आयोग की एक टीम जम्मू-कश्मीर में हालात का जायजा लेने गई थी. वरिष्ठ पत्रकार और जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले राहुल जलाली का कहना है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद जो कार्रवाई हो रही है, इससे एक सिलसिला शुरू हुआ है. इसे रोक कर विधानसभा चुनाव कराने में दिक्कत आ सकती है. लोकसभा के मुकाबले विधनसभा चुनाव में ज्यादा उम्मीदवार होंगे ऐसे में आज के माहौल में सभी को सुरक्षा देने में मुश्किल हो सकती थी. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की 6 सीट और विधानसभा की 87 सीटे हैं.

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