शीत युद्ध दौर की इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फ़ोर्स यानी आईएनएफ़ संधि से अलग होने के बाद रूस ने कहा है कि वो नई मिसाइल प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है.
आईएनएफ़ संधि के तहत रूस और अमरीका पर छोटी और मध्य दूरी की मिसाइलें इस्तेमाल पर प्रतिबंध था.
अमरीका लंबे वक़्त से रूस पर ये आरोप लगाता रहा था कि वो इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते हफ़्ते एलान किया कि अमरीका इस समझौते से अलग हो रहा है. इसके बाद रूस भी इस समझौते से बाहर हो गया.
इसके बाद हथियारों की नई होड़ शुरू होने को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है.
अमरीका और रूस ने शीत युद्ध के दौरान साल 1987 में आईएनएफ़ पर दस्तख़्त किए थे. तब ये समझौता तनाव घटाने के मक़सद से किया गया था.
रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगू ने मंगलवार को कहा कि अगले दो सालों में रूस ने सतह से मार करने वाली नई मिसाइल बनाने का लक्ष्य तय किया है.
आईएनएफ़ संधि के तहत ज़मीन से मार करने वाली मिसाइलों पर प्रतिबंध था लेकिन समुद्र और हवा से दागी जाने वाली मिसाइलों पर प्रतिबंध नहीं था.
लिहाज़ा रूस के पास ऐसी मिसाइलें मौजूद हैं और वो नई प्रणाली विकसित करने में इनका इस्तेमाल कर सकता है.
शोयगू ने कहा, ''अमरीका पहले से ही समझौते का उल्लंघन कर रहा था. अमरीका पांच सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने में सक्षम मिसाइल बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो संधि की सीमाओं के बाहर है.''
उन्होंने आगे कहा, "इस स्थिति में रूसी राष्ट्रपति ने रक्षा मंत्रालय को 'जैसे को तैसा' की तर्ज पर काम करने को कहा है."
अमरीका ने रूस के एलान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन समाचार एजेंसी एपी ने बीते हफ़्ते ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया था कि आईएनएफ़ के तहत जिन मिसाइलों पर पाबंदी थी, उनके परीक्षण या तैनाती की अभी कोई योजना नहीं थी.
ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ-साथ आईएनएफ़ के बाहर के देशों, खास कर चीन की ओर से पैदा ख़तरे पर चिंता व्यक्त की है.
इस संधि से खुद को अलग करते हुए अमरीका ने कहा कि उसे इस संधि से पूरी तरह बाहर आने में छह महीने का वक्त लगेगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हम इस संधि या किसी अन्य संधि में एकतरफा रूप से बाध्य देश नहीं हो सकते."
अमरीका ने आरोप लगाया कि रूस कई तरह से समझौता उल्लंघन कर रहा है. अमरीका ने दावा किया कि रूस की एक नई मिसाइल संधि के तहत प्रतिबंधित 500-5500 किलोमीटर की सीमा में आती है.
वहीं, रूस का कहना है कि अमरीका इस संधि का उल्लंधन करता रहा है. रूस का कहना है कि वाशिंगटन झूठे आरोप लगा रहा है. वह इस समझौते से बाहर निकलना चाहता है, जिसका वो कभी हिस्सा नहीं बनना चाहता था.
बीबीसी के रक्षा और कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि अमरीका पहले से ही कहता रहा है कि रूस इस संधि का उल्लंघन कर रहा है.
रूस ने संधि को अनदेखा करते हुए जमीन से प्रक्षेपित की जाने वाली 9M729 या SSC-8 क्रूज़ मिसाइल तैनात की है. संधि के तहत जिन हथियारों पर पाबंदी थी रूस उनकी होड़ में पहले ही आगे निकल चुका है.
ऐसी रिपोर्टों हैं, जिनमें ये संभावना जाहिर की गई है कि रूस पहले ही ऐसी करीब 100 मिसाइलों की तैनाती कर चुका है.
रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब समंदर से प्रक्षेपित की जाने वाली कैलिबर मिसाइल का सतह से मार करने वाला संस्करण तैयार करने की बात कर रहे हैं. वो हाइपर सॉनिक हथियारों की बात भी कर रहे हैं और अमरीका की राय है कि रूस बीते कुछ समय से इस पर काम भी कर रहा है.
इसलिए शायद यहां नया कुछ भी नहीं है.
दूसरी ओर अमरीका भी नई मिसाइलें विकसित करने और रिसर्च के लिए फ़ंड दे रहा है.
लेकिन हथियारों की असल होड़ यूरोप के बजाए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हो सकती है. अमरीका और रूस दोनों ही इस क्षेत्र में चीन के हथियारों के बढ़ते जखीरे को लेकर सावधान हैं. चीन पर कभी किसी हथियार नियंत्रण संधि के तहत कोई प्रतिबंध नहीं रहा है.
आईएनएफ़ संधि के तहत रूस और अमरीका पर छोटी और मध्य दूरी की मिसाइलें इस्तेमाल पर प्रतिबंध था.
अमरीका लंबे वक़्त से रूस पर ये आरोप लगाता रहा था कि वो इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते हफ़्ते एलान किया कि अमरीका इस समझौते से अलग हो रहा है. इसके बाद रूस भी इस समझौते से बाहर हो गया.
इसके बाद हथियारों की नई होड़ शुरू होने को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है.
अमरीका और रूस ने शीत युद्ध के दौरान साल 1987 में आईएनएफ़ पर दस्तख़्त किए थे. तब ये समझौता तनाव घटाने के मक़सद से किया गया था.
रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगू ने मंगलवार को कहा कि अगले दो सालों में रूस ने सतह से मार करने वाली नई मिसाइल बनाने का लक्ष्य तय किया है.
आईएनएफ़ संधि के तहत ज़मीन से मार करने वाली मिसाइलों पर प्रतिबंध था लेकिन समुद्र और हवा से दागी जाने वाली मिसाइलों पर प्रतिबंध नहीं था.
लिहाज़ा रूस के पास ऐसी मिसाइलें मौजूद हैं और वो नई प्रणाली विकसित करने में इनका इस्तेमाल कर सकता है.
शोयगू ने कहा, ''अमरीका पहले से ही समझौते का उल्लंघन कर रहा था. अमरीका पांच सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने में सक्षम मिसाइल बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो संधि की सीमाओं के बाहर है.''
उन्होंने आगे कहा, "इस स्थिति में रूसी राष्ट्रपति ने रक्षा मंत्रालय को 'जैसे को तैसा' की तर्ज पर काम करने को कहा है."
अमरीका ने रूस के एलान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन समाचार एजेंसी एपी ने बीते हफ़्ते ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया था कि आईएनएफ़ के तहत जिन मिसाइलों पर पाबंदी थी, उनके परीक्षण या तैनाती की अभी कोई योजना नहीं थी.
ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ-साथ आईएनएफ़ के बाहर के देशों, खास कर चीन की ओर से पैदा ख़तरे पर चिंता व्यक्त की है.
इस संधि से खुद को अलग करते हुए अमरीका ने कहा कि उसे इस संधि से पूरी तरह बाहर आने में छह महीने का वक्त लगेगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हम इस संधि या किसी अन्य संधि में एकतरफा रूप से बाध्य देश नहीं हो सकते."
अमरीका ने आरोप लगाया कि रूस कई तरह से समझौता उल्लंघन कर रहा है. अमरीका ने दावा किया कि रूस की एक नई मिसाइल संधि के तहत प्रतिबंधित 500-5500 किलोमीटर की सीमा में आती है.
वहीं, रूस का कहना है कि अमरीका इस संधि का उल्लंधन करता रहा है. रूस का कहना है कि वाशिंगटन झूठे आरोप लगा रहा है. वह इस समझौते से बाहर निकलना चाहता है, जिसका वो कभी हिस्सा नहीं बनना चाहता था.
बीबीसी के रक्षा और कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि अमरीका पहले से ही कहता रहा है कि रूस इस संधि का उल्लंघन कर रहा है.
रूस ने संधि को अनदेखा करते हुए जमीन से प्रक्षेपित की जाने वाली 9M729 या SSC-8 क्रूज़ मिसाइल तैनात की है. संधि के तहत जिन हथियारों पर पाबंदी थी रूस उनकी होड़ में पहले ही आगे निकल चुका है.
ऐसी रिपोर्टों हैं, जिनमें ये संभावना जाहिर की गई है कि रूस पहले ही ऐसी करीब 100 मिसाइलों की तैनाती कर चुका है.
रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब समंदर से प्रक्षेपित की जाने वाली कैलिबर मिसाइल का सतह से मार करने वाला संस्करण तैयार करने की बात कर रहे हैं. वो हाइपर सॉनिक हथियारों की बात भी कर रहे हैं और अमरीका की राय है कि रूस बीते कुछ समय से इस पर काम भी कर रहा है.
इसलिए शायद यहां नया कुछ भी नहीं है.
दूसरी ओर अमरीका भी नई मिसाइलें विकसित करने और रिसर्च के लिए फ़ंड दे रहा है.
लेकिन हथियारों की असल होड़ यूरोप के बजाए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हो सकती है. अमरीका और रूस दोनों ही इस क्षेत्र में चीन के हथियारों के बढ़ते जखीरे को लेकर सावधान हैं. चीन पर कभी किसी हथियार नियंत्रण संधि के तहत कोई प्रतिबंध नहीं रहा है.
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