RBI की मीटिंग, राहुल बोले- उम्मीद है मोदी को उनकी जगह दिखाएंगे उर्जित पटेल

केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है. इस विवाद के बीच आज आरबीआई बोर्ड की बड़ी बैठक हो रही है, इस बैठक में इस विवाद पर चर्चा हो सकती है. बैठक से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

सोमवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर लिखा, मिस्टर मोदी और उनकी मंडली, लगातार देश के संस्थानों को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं. आज आरबीआई की बैठक में अपनी कठपुतलियों के द्वारा वह इसकी कोशिश करेंगे. मुझे लगता है कि उर्जित पटेल और उनकी टीम प्रधानमंत्री को उनकी जगह दिखाएगी.

बैठक से सुलझेगा विवाद!

गौरतलब है कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच जारी गतिरोध के बीच आज बैंक के बोर्ड की मीटिंग हो रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच अहम बिंदुओं पर सहमति बन सकती है. मुंबई में ये बैठक शुरू हो गई है.

काफी लंबे समय से चल रही है तनातनी

सरकार और रिजर्व बैंक के बीच कथित तनातनी लंबे वक्त से देखने को मिल रही है, जिसके बीच आज बैंक के निदेशक मंडल की बैठक हो रही है. इससे पहले सरकार और बैंक की तरफ से टिप्पणी की जाती रही हैं.

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य अपनी टिप्पणी में कह चुके हैं कि सरकारें जो अपने केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करतीं, उन्हें जल्दी या देरी में वित्तीय बाजार की नाराजगी का सामना करना होगा. वहीं दूसरी तरफ आरबीआई गवर्नर इस घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुके हैं.

देश की देश की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज 101वीं जयंती है. ये कहना गलत नहीं होगा इंदिरा कठोर फैसले वाली महिला थी. वह प्रभावी व्यक्तित्व वाली मृदुभाषी महिला थीं और अपने कड़े से कड़े फैसलों को पूरी निर्भयता से लागू करने का हुनर जानती थीं. आइए जानते हैं इंदिरा के कड़े फैसले के बारे में.... 

इंदिरा को सत्ता विरासत में मिली थी, लेकिन वो हालात बहुत मुश्किल थे. इंदिरा विपक्ष के निशाने पर थीं, यहां तक की उन्हें गूंगी गुड़िया तक कह दिया गया. लेकिन इंदिरा ने अपने विरोधियों को दिन में ही तारे दिखा दिए. गूंगी गुड़िया कहने वालों की बोलती बंद कर दी.

लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री तो बन गईं, लेकिन पार्टी में बगावत हो गई. मोरारजी देसाई पार्टी के फैसले से नाराज हो गए. हालांकि मोरारजी देसाई और इंदिरा के आंकड़े हमेशा छत्तीस के रहे, फिर भी इंदिरा ने मोरारजी देसाई को उपप्रधानमंत्री बनाया था.

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